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मित्रों, कलम केवल लिखने का औज़ार नहीं, यह विचारों की क्रांति और भावनाओं की ज्योति है। जब कवि इसे थामता है तो यह प्रेम और प्रकृति का संगीत बन जाती है। जब लेखक संभालता है तो यह अन्याय के विरुद्ध विद्रोह का स्वर बनकर समाज को आईना दिखाती है। यही कलम रचनाओं को कागज़ से पाठकों तक पहुँचाते हुए पीढ़ियों को जोड़ती है। सच में, तलवार नहीं, कलम ही वह शक्ति है जो दिल और दुनिया दोनों बदल सकती है।