दिल की राख
---
शिर्षक: “दिल की राख”
शायरी
रात ने चाँद को भी छुपा लिया किसी बात पर,
हमने भी दिल को सुला लिया हर आघात पर।
अब ना तेरा नाम, ना कोई इलज़ाम बाकी,
बस राख रह गई है उस जज़्बात पर।
वो हँसी, वो ...
शिर्षक: “दिल की राख”
शायरी
रात ने चाँद को भी छुपा लिया किसी बात पर,
हमने भी दिल को सुला लिया हर आघात पर।
अब ना तेरा नाम, ना कोई इलज़ाम बाकी,
बस राख रह गई है उस जज़्बात पर।
वो हँसी, वो ...
प्रेम