शिर्षक -शबरी की राहों में राम आये
विधा - कविता
श्रेणी - अध्यात्मिक
शिवरीनारायण के घाट पे,
तीन नदियाँ मिल गइ रे,
राम नाम गाती लहरें —कब राम मेरे घर आये
शबरी रोज जपती रहती,
बेर चुनती आस लगाए,
एक ही सपना मन में — कब राम मेरे घर आये।
खरौद वाली रेत पे बैठी,
प्रेम से दीप जलाती,
राम नाम लेकर रोती — कब प्रभु झोंपड़ी में आति।
एक दिन जंगल महक उठा,
पायल बजे हल्की-हल्की,
शबरी दौड़ी बाहर बोली — आये ना राम छलकती।
प्रभु ने हँसकर हाथ बढ़ाया,
शबरी चरणों में गिर गई,
बेरों वाली थाली लेकर — कहै प्रभु, ये लो, मैंने दई।
राम ने प्रेम से बेर खाए,
बोले — "भक्ति सबसे भारी",
शबरी की आँखों में खुशी — जैसे खिल गइ कली न्यारी।
आज भी वही कहानी गूँजे,
शिवरीनारायण से खरौद तक,
सब गाते एक ही भजन — शबरी की राहों में राम तक।
रचनाकार - हरनारायण कुर्रे, मुड़पार चु, पोस्ट रसौटा, तहसील पामगढ़, जिला जांजगीर चांपा,छत्तीसगढ़
शबरी की राहों में राम आये
शबरी की राहों में राम आये
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