कलम संगिनी

कलम संगिनी

रूख के पानी

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 93 Posts Oct 2025

रूख के पानी

14 Views
0 Likes 0 Comments
1 Saves
0 Shares
रूख के पानी
"रूख के पानी" छत्तीसगढ़ी कविता मौलिक रचना रूख कहिथे चुपचाप, पानी मोर जान आय, माटी मं समा जाथे, तब हरियर प्रान आय। घाम-बरसात सहिथौं, छाया मैं देथौं, एक घूंट पानी खातिर, जीवन भर देथौं। जड़ मं बस गे सपने, डार मं आस लहराय, पानी बिना रूख बिनस जाही, धरती रोय-रोय। मनखे अगर समझ जाही, रूख के ये गुहार, बच जाही ये धरती मं, जीवन के आधार। पानी बचा ले मनखे, रूख संग निभा नाता, रूख बांचे तं बांचे, तोर-हमर ये साता। रचनाकार कौशल 18.01.2026

Comments (0)

Click to view
Footer