कलम संगिनी

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मुझे बचाओ

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 93 Posts Oct 2025

मुझे बचाओ

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शिर्षक – मुझे बचाओ कविता प्रकृति स्वरचित रचनाकार – कौशल --- दर्द की राहों में डूबा मन, हाँफ रहा टूटी सांसों में, टूटे सपने जलते भीतर, जैसे धुआँ हो आहों में। सूनी रातें चीख उठा दें, तनहा दिल के अँधियारे में, यादों की छाया सर्प बने, चुभ जाएँ मेरे हर धारे में। भीतर-भीतर जलता रहता, मौन ज्वाला का यह मौसम, आँखें सूखी, मन पथरा-सा, बनता जाता तुच्छ-सा शरीरम। काँटों जैसी चाहत टूटी, ज़ख्म पुराने फिर उभराएँ, हर धड़कन में दर्द की लय, चिर पीड़ा बन मुझको गहराएँ। अपनों की परछाईं फीकी, कोई न मेरे पास आता, भटके कदमों जैसा लगता, हर उम्मीद किनारा छू जाता। थकता मन जब चुपचाप गिरे, टूटे क्षण को सम्हाल न पाऊँ, साँसों का बोझ बढ़ा इतना, चीखें भी अब बाहर न लाऊँ। यदि मेरी पुकार सुनो तुम, बस इतनी-सी दया दिखाओ, वेदना के इस गहरे सागर से… थाम लो मुझको— मुझे बचाओ। कौशल

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