अपने हृदय में जगह बनाये रखना
आपकी क्या बात है प्रिय मित्र,
चुन चुनकर मोती हीरे लाते हो,
धड़कने दिल की बढ़ जाती हैं,
जब ऐसे सुंदर गीत गुनगुनाते हो।
आप जो भी बात कहते हो,
आप जो भी विचार रखते हो,
निश्चय एक सीख दे देता है,
अमल करना पड़ ही जाता है।
आपके अमृत वचन निःसंदेह
जीवन को प्रगति पथ देते हैं,
एक व्यक्ति के लिए ही नहीं,
समाज के लिये बेशक़ीमती हैं।
अब तो आप बहुत ख़ास हो गये हैं,
हृदय के बेहद क़रीब आ गये हैं,
अपना स्नेह ऐसे ही बनाये रखना,
अपने हृदय में जगह बनाये रखना।
ऐसे ही सदा सद्गुण बिखेरते रहो,
आपस में प्रेम - स्नेह बाँटते रहो,
मेरी शुभ कामनायें आपके लिये हैं,
आदित्य प्यार के गीत गुनगुनाते रहो।
डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ
अपने हृदय में जगह बनाये रखना
अपने हृदय में जगह बनाये रखना
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