शीर्षक: प्रभु तू साथ चलना
लेखक: हरनारायण कुर्रे
स्थान: मुड़पार चु, पोस्ट रसौटा, तहसील पामगढ़, जिला जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़
श्रेणी: काव्य
संक्षिप्त परिचय: यह भजन व्यक्तिगत भक्ति और जीवन के अनुभव से प्रेरित है। इसमें प्रभु की कृपा, श्रद्धा और आत्मिक शांति का संदेश है।
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एक बहारों में अकेले न फिरूँ,
प्रभु तू मेरा सहारा बन।
जीवन की इस कठिन राह पर,
तेरा नाम ही उजियारा बन।।
जब आँसू से मन भीग जाता,
दिल में पीड़ा गहराती है।
तेरे चरणों की छाँव पाकर,
रूह को शांति मिल जाती है।।
जब सब अपने दूर हो गए,
सुख के सारे सपने खो गए।
तेरी याद ही मेरा संबल है,
तेरे दर पर सिर झुकाते हो गए।।
तू ही माली, तू ही रखवाला,
तेरे बिना सब सूना-सूना।
तेरी दया का दीपक जलाकर,
हर अंधियारा हो जाए रोशन।।
एक बहारों में अकेले न फिरूँ,
प्रभु तू मेरा सहारा बन।
जीवन की इस कठिन राह पर,
तेरा नाम ही उजियारा बन ...।।
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प्रभु तू साथ चलना
प्रभु तू साथ चलना
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