कलम संगिनी

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हिंदी पावन गान है

हिंदी पावन गान है

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हिंदी पावन गान है
📚✨ *हिंदी पावन गान है* ✨📚 (स्वरचित - दोहा छंद) 1️⃣ हिंदी पावन गान यह, संस्कृति की शान। अपनाएँ हम सब इसे, भारत की पहचान॥ 2️⃣ सजग करे निज आत्मा, जग में फैले ज्ञान। ममता-स्नेह समर्पित, हिंदी पावे मान॥ 3️⃣ गंगा-सी पावन बहे, हिंदी का संवाद। हर शब्द में गूँज उठे, स्नेह-प्रेम का नाद॥ 4️⃣ विज्ञान विवेक सहित, मधुर सरल हर स्वर। हिंदी से ही मिलजुलें, सजे सदा यह घर॥ 5️⃣ जन-मन को यह छू सके, सरल सरस अंदाज़। हिंदी की मधुर वाणी, लाए प्रेम समाज॥ 6️⃣ धरती आकाश नाद यह, जीवन का संचार। हिंदी में ही झलकेगा, भारत का सत्कार॥ 7️⃣ शब्द विन्यास सुगढ़ हो, भावों का रस रंग। हिंदी से ही महकेगा, हर उत्सव का संग॥ 8️⃣ वेद-पुराणों की गूँज, संतों का उपदेश। हिंदी ने सब बाँधकर, दिया प्रेम विशेष॥ 9️⃣ विश्व पटल गूँजे सदा, हिंदी की पहचान। पावन गान बने सदा, बढ़े अमर सम्मान॥ 🔟 भारत-भाषा अमर यह, उज्ज्वल इसका नूर। हिंदी ज्योति प्रखर बन, जगमग हो भरपूर॥ ✍️ योगेश ग़हतोड़ी "यश" (ज्योतिषाचार्य) मोबाईल: 9810092532 नई दिल्ली - 110059

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