कलम संगिनी

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क्रोध एक नकारात्मक दुष्प्रवृत्ति

adi.s.mishra

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क्रोध एक नकारात्मक दुष्प्रवृत्ति

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क्रोध एक नकारात्मक दुष्प्रवृत्ति
*क्रोध एक नकारात्मक दुष्प्रवृत्ति है* काम, क्रोध, मद, लोभ सब नाथ नरक के पंथ, सब परिहरि रघुबीरहिं, भजहु भजहिं जेहि संत। काम वासना, लोभ, अहंकार और क्रोध जैसे दुर्गुण मनुष्य की मानसिक स्पष्टता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।जिससे भ्रांति की स्थिति उत्पन्न होती है और भ्रम बढ़ता है, निर्णय लेने की क्षमता कमज़ोर होती है, और याददाश्त प्रभावित होती है, यही गीता में भी श्री कृष्ण जी ने बताया है। यह दुर्गुण तनाव के हार्मोन (एड्रेनालाईन) बढ़ाते हैं और मस्तिष्क के सही सोचने वाले हिस्सों को बाधित करते हैं, जिससे व्यक्ति अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याओं की ओर बढ़ता है और गलत निर्णय लेने लगता है। क्रोध से मानसिक भ्रम की स्थिति बनती है, जिससे व्यक्ति सही-गलत का भेद नहीं कर पाता और उसकी याददाश्त (स्मृति) भी कमजोर होने लगती है, जिससे बुद्धि का ह्रास होता है। गुस्से में व्यक्ति सही निर्णय नहीं ले पाता, जिससे जीवन और कठिन हो जाता है और क्रोध के दौरान शरीर में एड्रेनालाईन और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन भर जाते हैं, जो मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं, साथ ही शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार करते हैं, लेकिन यह स्पष्ट सोच में बाधा डालता है। इस पर अध्ययनों से पता चलता है कि क्रोध मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करता है जो सहानुभूति के नियमन में शामिल होते हैं, जिससे भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ जाती है। अन्य मानसिक समस्याओं से लंबे समय तक रहने वाला या तीव्र क्रोध अवसाद, चिंता और आत्म-क्षति जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है और उनके लक्षणों को और बिगाड़ सकता है। निष्कर्ष स्वरूप हम कह सकते हैं कि क्रोध एक शक्तिशाली भावना है जो मनुष्य की सोचने-समझने की क्षमता (मानसिक स्पष्टता) को पूरी तरह से खत्म कर देती है, जिससे गलतियां होती हैं और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिये हमें इन नकारात्मक प्रवृत्तियों से स्वयं को दूर रखना है और सदैव सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’ लखनऊ:07 दिसंबर 2025

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