कलम संगिनी

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श्रृंगार

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 99 Posts Oct 2025

श्रृंगार

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श्रृंगार
श्रृंगार अलकें बिखरीं, नयनों में लाज समाई, ओठों की मुस्कान ने धड़कन जगाई। चूड़ियों की छन-छन, पायल की तान, मन के उपवन में खिल उठा अरमान। केसरिया आभा, काजल की रेखा, सौंदर्य में सजी भावों की लेखा। सुगंधित केश, मुख पर उजली भोर, रूप में रचा प्रेम का मधुर शोर। लज्जा का आँचल, चितवन का खेल, निश्छल भावों में बंधा जीवन मेल। श्रृंगार नहीं केवल तन की शान, आत्मा की ज्योति, प्रेम की पहचान। स्वरचित कौशल छत्तीसगढ़

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