कलम संगिनी

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सत्यात्म तीर्थ गुरु देव

सत्यात्म तीर्थ गुरु देव

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सत्यात्म तीर्थ गुरु देव
सत्यात्म तीर्थ के चरणों का आलोक, जीवन में मिला, मिटा दिया सब शोक। गुरु की वाणी अमृत से प्यारी, हर धड़कन में गूँजे संस्कारी। मेरा सौभाग्य, मुझे गुरूपदेश मिला, भटके पथिक को सच्चा दिशा मिला। अज्ञान तम का हर अंधकार मिटा, ज्ञान का सूरज अंतर में खिला। उत्तरादि मठ का तेज अनूपम, सत्य के दीप से जग आलोकितम। गुरु करुणा से जीवन संवर जाता, भक्ति का सागर हृदय में उतर जाता। हे गुरुदेव! चरणों में शीश नवाऊँ, आपकी कृपा से जगत को अपनाऊँ। सत्यात्म तीर्थ का प्रकाश अमर रहे, हर शिष्य का जीवन सद्भाव से भरे।

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