कलम संगिनी

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मन के बोझा

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 93 Posts Oct 2025

मन के बोझा

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शिर्षक - मन के बोझा विधा - छत्तीसगढ़ी कविता श्रेणी- प्रेरणादायक रचनाकार -कौशल मन के बोझा दिन-ब-दिन बढ़थे, सोच के जंजीर, नींद के घड़ी घटथे। बीते बात ला मन मा रखके, आज के उजियार घलो फीका पड़थे। अपन गलती ला स्वीकार कर ले, बारे-बारे आत्मा ला समझा ले। मन के बोझा कि मिट जाए तब, नवा राह म सपन ला सजा ले। हे मन, काबर इतका गुनथस सबद? मोर मइया के गोदी जइसे सुखद। दुख-तकलीफ त आथें सबो संग, हँसी-खुशी बाँट, बन जा बहादुर संग। जीवन के रस्ता कठिन जरूर हे, हिम्मत से चल, मुस्कान जरूर हे। मन के बोझा जब उतर जाही, सपना साकार हो जाही ।। – कौशल

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