कलम संगिनी

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दर्पण

HARNARAYAN KURREY

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1 Followers 99 Posts Oct 2025

दर्पण

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शिर्षक – "दर्पण" विधा – कविता मौलिक रचना दर्पण ने जब सच का चेहरा दिखलाया, झूठ का हर आवरण स्वयं उतर आया। जो थे भीतर, वही बाहर दिखने लगे, शब्द मौन हुए, भाव मुखर होने लगे। चेहरे बदलते रहे, भाव न बदले, स्वार्थ की छाया में सपने भी सिमटे। दर्पण ने न पूछा, न कोई प्रश्न किया, जैसा था इंसान, वैसा ही चित्र दिया। दोषों की रेखा भी साफ़ उभर आई, गुणों की चमक भी कहीं छिप न पाई। जो खुद को पहचाने, वही आगे बढ़े, दर्पण का संदेश यही, सच से जुड़े। रचनाकार – "कौशल"

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