कलम संगिनी

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औजार

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 98 Posts Oct 2025

औजार

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औजार
शिर्षक – औज़ार विधा – कविता मौलिक रचना रचनाकार – कौशल माँ के हाथों के औज़ार, खामोशी से बोले, भूखी रातों में सपने, आँचल में ही सोले। घिसी हुई कुदाल कहे, पसीने की कहानी, हर वार में दबी हुई, बच्चों की मुस्कानी। बाप के फटे औज़ारों में, लहू की है पहचान, उनकी धार से कटती रही, अपनी ही हर अरमान। हथौड़े की हर चोट में, दबा हुआ है सिसकना, रोटी के बदले बिकता रहा, सपनों का ही रिसकना। खेतों में रोती हँसिया, कारखाने में शोर, इन औज़ारों ने पाला है, पीढ़ियों का दर्द चोर। जब चमकते हाथों में, सोने के सपने आते, मेरे औज़ार आज भी, चुपचाप आँसू बहाते। कौशल छत्तीसगढ़

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