शिर्षक - गुजरता हुआ समय
विधा -कविता
मौलिक रचना
रचनाकार -कौशल
समय की धारा, आंसुओं से लथपथ बहती,
नदिया सी अनंत, पर दिल को चीरती, रक्तिम।
कल की यादें, आग सी जलाती छाती,
आज की हँसी, कल की उदासी का कांटा, बेईमान।
घड़ी की सुईं, हर कदम पर चुभती सिसकियाँ,
जीवन की किताब, पन्ने फाड़ती, खून से रंगी।
बचपन की मासूमियत, आह! खो गई कहीं,
यौवन की उमंग, अब सिर्फ़ दर्द की धुंध, काली।
वक्त के क्रूर हाथों में, सब टूट जाता है,
मित्र बने दुश्मन, प्रेम बने ज़ख्म गहरे।
सपनों की डोर, टूटकर बिखर जाती राख सी,
पर हर रात, पुरानी यादें लौट आतीं, रोतीं।
गुजरता समय, एक साक्षी, आंसू निगलता,
सिखाता सबक, दिल की गहराइयों में चुभोकर।
ग्रहण कर लो ये पल, ये क्षण, ये आंसू अनमोल,
क्योंकि कल आएगा, नया दर्द, नई तन्हाई का दौर। ।
कौशल
मुड़पार चु पोस्ट रसौटा तहसील पामगढ़ जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़
गुजरता हुआ समय
गुजरता हुआ समय
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