"भारतीय गणतंत्र दिवस"
कविता
मौलिक रचना
भारतीय गणतंत्र का उत्सव, सीने में दर्द जगाता,
संविधान की ज्योति, आंसुओं से तर आंखों की बात।
26 जनवरी की वो सुबह, दिल की गहराई से रोती,
स्वतंत्र भारत की कहानी, शहीदों के खून से सनी वो सड़कें।
तिरंगा लहराता आकाश में, रूह को झकझोरता,
एकता की वो चीख, विविधता में बसी वो पीड़ा गहरी।
वीरों के बलिदान, हर सांस में दुख की लहर,
गांधी, नेहरू की विरासत, दिल को चीरती यादें।
संविधान की धारा, आंसुओं का उफनता समंदर,
न्याय, समानता, भाईचारा, हर दिल की करुण पुकार।
महिलाएं, किसान, युवा, सबकी टूटती आहें,
प्रगति की राह पर, सपनों की वो टूटी उड़ान।
शिक्षा की रोशनी, स्वास्थ्य की वो कराहती छांव,
विकास की कहानी, दर्द में डूबी, रुलाती हर शाम।
गणतंत्र हमारा, रूह की गहराई से चीखता,
भारत माता की जय, आंसुओं से लथपथ ये नारा।
रचनाकार
"कौशल"
छत्तीसगढ़
27.01.2026
भारतीय गणतंत्र दिवस
भारतीय गणतंत्र दिवस
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