विर्षक- शहद की मिठास
विधा -कविता
मौलिक रचना
पीली किरणों में छुपी वो मिठास,
फूलों की आत्मा से बनी अमृत की धारा,
मधुमक्खियों की मेहनत में बसी वो करुणा,
शहद, जीवन की वो मीठी सिसकी, जो दिल को छू जाती है।
हर सुबह की पहली किरण सा, वो आता है धीरे से,
अकेले दिल की गहराइयों में उतरकर,
पुरानी यादों को जगाता है, आंसुओं में मुस्कान घोलता है।
हर बूंद में छिपा प्रकृति का उदास गान,
दुनिया की कड़वाहट को आंसुओं से हरता,
यादों की लहरों में बहता है यह,
शहद, प्रेम की वो अनमोल सौगात, जो खोए हुए सपनों को लौटा लाता है।
बचपन की उन मीठी कहानियों सा, वो चुपके से आता है,
माँ की गोद में छिपी वो गर्माहट,
जो ठंडी रातों में दिल को सहलाती है, दर्द को भुलाती है।
ओस की बूंदों सा नाजुक, दिल की गहराई में उतरता,
अकेलेपन की रातों में साथी बनकर चमकता,
माँ की लोरी सा सुकून देता,
शहद, वो भावुक स्पर्श, जो आत्मा को गले लगा लेता है।
जब जीवन की राहें कटीली हो जाती हैं,
वो मीठा घाव भरता है, धीरे-धीरे,
प्रेम की उन टूटी डोरों को जोड़ता है,
और खोई हुई उम्मीदों को फिर से जगा देता है।
फूलों की पंखुड़ियों से चुराई वो खुशबू,
हवाओं में घुलकर दिल तक पहुंचती है,
प्रेमी की वो पहली नजर सा, वो छू जाता है,
शहद, वो अनकही कहानी, जो आंखों में आंसू ला देती है।
दूर देश की वो मिट्टी की महक सा,
घर की याद दिलाता है, अपनों की कमी महसूस कराता है,
पर फिर भी, वो मीठा दर्द है, जो जीने की वजह बन जाता है।
समय की रेत में बहते हुए पल,
शहद सा चिपक जाता है यादों में,
बुजुर्गों की वो झुर्रियों वाली मुस्कान सा,
जो जीवन की सच्ची मिठास बताता है।
जब दुनिया ठंडी और निर्दयी लगे,
वो एक बूंद काफी है, दिल को पिघलाने के लिए,
शहद, वो भावुक यात्रा, जो अंत तक साथ निभाती है,
प्रकृति की गोद से निकली वो प्रार्थना, जो हर दुख को मिटाती है।
और जब रातें लंबी हो जाती हैं,
तारों के बीच वो चमकता है सपनों में,
प्रेम की वो अनंत कहानी सा,
शहद, जीवन की वो मीठी विरासत, जो पीढ़ियों को जोड़ती है।
हर दिल की धड़कन में बसा वो रहस्य,
जो कभी नहीं खत्म होता, बस बहता रहता है,
भावुक होकर, आंसुओं में घुलकर,
शहद, वो अमर प्रेम, जो आत्मा को हमेशा छूता रहता है।
रचनाकार
कौशल
मुड़पार चु
छत्तीसगढ़
27.01.2026
शहद की मिठास
शहद की मिठास
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