"साधन नहीं, साध्य हूं...!?
"मैं कली नहीं किलकार हूं
मैं अबला नहीं, तलवार हूं
मैं साधन नहीं साध्य हूं
अपने अस्तित्व का सार हूं।
अरे..! क्या लगा मैं नारी हूं, थोड़ी सी शरमाई हूं।
जाकर देख लो मेरी ताकत को, मैं लक्ष्मी हो अहिल्या और वो शारदा ।
सशक्त मेरे जीवन खण्ड में, अपने सपनों के रण जल में।
मैं बहती रही नर झरानों में, मैं उठी वही ज्वाल बनकर।
मैं नाम नहीं, चरित्र हूं
मैं उर्वशी नहीं, सीता हूं।
उफ़...! मैं नारी नहीं नरतत्व हूं,भूखंड भुण से पूर्ण हूं।
नौ माह वो शेष समय,प्रसव पीड़ा से चूर्ण हुं!
श्रृंगार का शोक नहीं, औरों से डरें वो रोक नही!
खुद से मर्यादित होकर, उड़ती रहूं नभ तल में!
आंचल मेरा ममत्व है ,
इज्ज़त मेरा चरित्र है,
किताबें मेरा श्रृंगार है,
By:- Neetu nagar 💯🥰✅
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