*श्री सीताराम जी का विवाह दिवस*
मंगल मूल लगन दिन आवा,
हिम ऋतु अगहन मास सुहावा,
ग्रह तिथि नखत जोग बर बारू,
लगन शोधि विधि कियो
विचारू।
सिया राम जी का मंगलमय पावन,
विवाह दिवस है अगहन मास शुक्ल पंचमी,
ज्योतिषी हैं पूज्य पितामह ब्रह्मा जी,
ग्रह नक्षत्र योग शोध कर विचारे हैं,
शुभ मुहूर्त अगहन मास शुक्ल पक्ष
पंचमी तिथि
महाराज जनक जी के ज्योतिषियों ने भी मुहूर्त को समर्थन दे दिया है।
वह मंगलमय शुभ दिन आ गया है।
मंगल गान होने लगे हैं बाजे बजने लगे हैं।
नगर आनंद उत्साह में डूब गया है नगर वासी खुशी से झूम रहे हैं।
आज उनकी किशोरी जी का परिणय है,
पूर्व और पश्चिम मिथिला और अवध का मिलन सुयोग शुभ मंगलमय है।
चक्रवर्ती महाराज दशरथ जी बारात सहित मिथिला में विराजमान हैं,
मिथिला वासी हर्षोल्लास में
आनंद मग्न हैं।
द्वारचार हुआ स्वागत सत्कार हुआ,
परब्रह्म परमात्मा राघव जी
दूल्हा सरकार हैं,
दुल्हन जनक नंदिनी जानकी जगज्जननी आदिशक्ति अवतार हैं।
ललित छटा छवि शोभा अपार है,
सुशोभित साज सज्जा में मंगल गान
करती हैं सखियां
दूल्हा सरकार राम जी का परिछन करती हैं सखियां।
विवाह मंडप में सियाराम जी विराजमान हैं,
वर वधू की गरिमा महिमा महान है,
शुभ शुभ कन्यादान नृप भूषन कियो गांठ जोरी गठबन्धन भयो,
भांवरी पड़ने लगी मंगल गान सखी करने लगी,
शुभ शुभ सिंदूरदान भयो विवाह विधि पूरन भयो।
देव पुष्प वृष्टि करें जय जयकार सुर नर मुनि करें,
आशीष आशीर्वाद दोऊ कुल गुरु करें आरती सखियां करें।
सोहती सियाराम की जोड़ी,
छवि सिंगार मनहु एक ठोरी।
सुभद्रा द्विवेदी, लखनऊ
श्री सिया राम जी का पाणिग्रहण संस्कार
श्री सिया राम जी का पाणिग्रहण संस्कार
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