कलम संगिनी

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मां का आंचल

मां का आंचल

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मां का आंचल
माँ का आंचल माँ का साथ छुट हि गया।।।। भगवान हमसे रूठ ही गया।।🥹 माँ के आंचल से दूर हुए।। माँ के शोक में भाव विभोर हुए।। माँ तुम घर की थी आन,बान, शान।।। अब तुम बिन लगता है ,सारा घर विरान।। माँ जब् तक तुमसे, बात न होती न दिन होती न रात सुकून से कटती ।। माँ से अब न ,हो सकती बात ।। किससे करेंगे दिल की फरियाद। घर के कोने कोने में माँ की छबि है बसी।। पर जान हमारी माँ में है बसी।। हमारें बच्चों की खुशी में भूल जाती अपना हर दुख।। अपने बच्चों को जीवन भर ,देती रही हर सुख।।।। माँ तुम सबसे खास हो ,,,,,,,,,,,, पर अब तुम बस एक अहसास हो ,,,🥹🥹 स्वरचित काव्य श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर विकासखण्ड सरायपाली जिला महासमुंद छत्तीसगढ़ #

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