कलम संगिनी

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अंतिम सांस के दर्द

HARNARAYAN KURREY

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1 Followers 98 Posts Oct 2025

अंतिम सांस के दर्द

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अंतिम सांस के दर्द (वृद्धावस्था के संदर्भ में) कविता विषाद रचनाकार -कौशल धीरे-धीरे श्वासें मंद पड़ती जाती हैं, झुर्रियों में बीता जीवन छुपा बैठा है। मन के आँगन में बिखरी यादें, अधूरी इच्छाएँ चुपचाप गिनती रहतीं हैं। चलना अब भारी, दृष्टि धुंधली हुई, अपनों की परछाइयाँ पास आकर फिर दूर चली जाती हैं— हर बात, हर रिश्ता अब मौन और मन खाली खाली सा रह जाता है। भीड़ में होकर भी अकेलापन, कमरे की दीवारें चुपचाप सुनती हैं— फटी चादर, काँपते हाथों में स्मृतियों का उजास अंतिम साँसों तक साथ रहता है। हृदय में टीस, शरीर में निर्बलता और आँखों में जीवन का थका हुआ दीपक— कोई पुकार शेष नहीं, कोई शिकायत भी नहीं, बस एक हल्की आँह— जो अंतिम सांस बन शून्य में विलीन हो जाती है। कौशल

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