कलम संगिनी

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तीर्थ राज प्रयाग

adi.s.mishra

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तीर्थ राज प्रयाग

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तीर्थ राज प्रयाग
तीर्थराज प्रयाग तीर्थ राज प्रयाग की महिमा अपरम्पार है, गंगा यमुना सरस्वती के संगम की पावन धार है। हरिद्वार से गंगा आईं धवल धार प्रवाह लिए, ब्रज धाम से यमुना आईं इठलाती श्यामल वर्ण लिए, बीच बीच में सरस्वती जी देती दर्शन श्वेत वर्ण अभिराम लिए। तीनों धार जहां मिलती हैं, संगम महातीर्थ बन जाता है, संगम सिंहासन है तीर्थ राज का अनुपम शोभा पाता है। प्रहरी बन कर खड़े हुए हैं अक्षयवट जी किले की प्राचीर में, महाप्रलय में भी दृढ़ रहते तीर्थराज प्रयाग में। बांध वाले वीर बजरंगी रक्षा करते भक्तों की, ऊंचे झंडे लहराते हैं परम कृपालु हनुमत की। भारद्वाज ऋषि की नगरी है ये राम कथा संवाद की, याज्ञवल्क्य जी कथा सुनाते श्री रामचरित महान की। माघ मास प्रति वर्ष यहां संतों का मेला लगता है, कण कण में तप की शक्ति से मन आनंदित होता है। माघ मकरगत रवि जब होई, तीरथपतिहि आव सब कोई, प्रति संवत् अति होय आनंदा, मकर मज्जी गवनहि मुनि वृंदा। सुभद्रा द्विवेदी, लखनऊ

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