कलम संगिनी

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लोक आस्था का महापर्व छठ

adi.s.mishra

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लोक आस्था का महापर्व छठ

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लोक आस्था का महापर्व छठ
आस्था उपासना का पर्व छठि भारत की धरती अति पावन धर्म आस्था की अद्भुत प्रतीक, अनेकता में एकता का संगम, दिखलाती जीवन पथ सटीक। लोक आस्था व भगवान सूर्य की आराधना, उपासना का त्योहार, उनकी भगिनी छठ माई की पूजा अर्चना वृत का अनुपम उपहार। इस महापर्व में भाई बहन की उपासना भारत में की जाती है, भगवान सूर्य के साथ साथ भगिनी उनकी छठ माई भी पूजी जाती हैं। छत्तीस घंटे का यह महावृत आस्था से परिपूरित विश्वास से भरा हुआ, पति पत्नी निर्जल वृत रखकर प्रकृति साधना में आस्थावान परिवार हुआ। नई नई ख़ुशियाँ नित-प्रति आती, दीवाली की ख़ुशियाँ गई नहीं अभी, छठ पूजा की ख़ुशियाँ आ जाती हैं, कठिन साधना की ख़ुशी छा जाती हैं। भारत ही एक देश ऐसा है जहाँ त्योहारों का भी मौसम होता है, नवरात्रि से होली तक रोज़ कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है। नवदुर्गा दशहरा, दुर्गापूजा, करवापूजा, धनतेरस, नर्क चौदस, दीवाली पूजा गोवर्धन पूजा, भाई दूज की भी पूजा और फिर आई है छठमाई की पूजा। शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति, माघी पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, आँवला पूजा, बरगद पूजा, पीपल पूजा और नीम पूजा। सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण व सूर्य चंद्र की, नवग्रहों की, हर दिन, तिथि की पूजा, देव उत्थानी एकादशी, अक्षय नौमी, बसंत पंचमी शिवरात्रि फिर होली। कैसा अद्भुत देश हमारा, सारे जग से सारी प्रकृति से है बिलकुल न्यारा, आदित्य विश्व गुरु हम पहले से हैं, दुनिया से प्यारा भारत देश हमारा। डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’ लखनऊ

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