कलम संगिनी

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शिव उपासना

adi.s.mishra

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शिव उपासना

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शिव उपासना
शिव उपासना इस सृष्टि के सृजनहार शिव, इस सृष्टि के पालक हैं शिव। सृष्टी के संहारक हैं शिव, भोलेनाथ प्रतिपालक हैं शिव। शिव ही तत्व है, शिव ही ब्रह्म है, शिव परमेश्वर, शिव ही सत्य है। अध्यात्म की महिमा में शिव है, जगत चराचार में भी शिव है। पार्वती हैं बुद्धि की देवी शिव, विवेक के दाता श्री गणेश शिव। रिद्धि- सिद्धि लक्ष्मी स्वरूप शिव, कार्तिकेय का शौर्य रूप शिव। अनुशासन में अति कठोर शिव, अनुशासित से हों प्रसन्न शिव। जीवन-आनंद सदा देते शिव, श्रावण के आराध्य सदा शिव। भक़्ति भाव आधीन हैं शंकर, भक्तों के खुद भक्त हैं शंकर। बाघाम्बर ओढ़ें त्रिशूल धर, जटा में गंग सम्भाले शंकर। वृषारूढ़ भोले शिव शंकर, ॐ कार जप करते शंकर। अर्धनारीश्वर भी शिवशंकर, राम नाम जपते शिव शंकर। सदा सामंजस्य बिठाते शिव हैं, प्रेम की राह दिखाते शिव हैं, नन्दीगण शिव जी के वाहन, सिंह शिवप्रिया माँ के वाहन। नाग गले में शिव के रहते, श्री गणेश के मूषक वाहन। संग सदा सब शिव के रहते, है मयूर कार्तिकेय का वाहन। शिव की कृपा बरसे हम सब पर, आदित्य कहें जोड़ दोऊ कर। शिव की महिमा शिव ही जाने, शिव ही सत्य हैं, शिव ही सुंदर। डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’ लखनऊ:

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