कलम संगिनी

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सूर्य शक्ति

सूर्य शक्ति

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सूर्य शक्ति
सूरज की किरणें जब फैलें, अंधियारे सब पल में छूटें। जीवन का संचार वही है, जग के हर प्राणी को छूते। ऊर्जा का असीम भंडार, धरती को जो देता आकार। फूल खिले, हरियाली फैले, सूर्य बिना सब शून्य-संसार। सूर्य तपे तो ऋतु सँवरे, कण-कण में चेतन भर जाए। सूर्य रुके तो गति भी थम जाए, समय का पहिया रुक-सा जाए। हे आदित्य, हे जीवन दाता, तेरी ज्योति अमर उजियारी। तेरी शक्ति से जग जीवित है, तू ही सृष्टि का आधार पवित्री।

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