शीर्षक – मया
छत्तीसगढ़ी कविता
मौलिक रचना
मया के बोली म मिठास घुलाय,
आंखी-आंखी म बात हो जाय।
बिना कहे सब समझ परथे,
मन के कोरा पन्ना भर जाय।
मया हे छांव जइसे गरमी म,
दुख म बनथे मीठ सहारा।
लड़ई-झगड़ा सब भूल जाथे,
मया ले जग सुंदर लागे सारा।
मया बिना सब सूना लागे,
सांस म घुल गे जिनगी सारा।
रचनाकार
कौशल
04.01.2026
मया
मया
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