शिर्षक – वीर बलिदान दिवस
स्वरचित
कविता
वीर बलिदान दिवस हमें गौरव गाथा सुनाता है,
माँ भारती की रक्षा में जो हँसते-हँसते जाता है।
मिट्टी की सौगंध लेकर, प्राणों का दान किया,
सीमा पर खड़े सपूतों ने इतिहास निर्माण किया।
गोली, बारूद, आँधी-तूफान कुछ भी रोक न पाए,
देशभक्ति की ज्वाला में डर खुद ही जल जाए।
माँ की ममता, पत्नी का आँचल याद बहुत आया,
पर तिरंगे की लाज ने सब मोह भुलाया।
उनके रक्त से सींची गई यह धरती महान,
हर कण में गूँजता रहता उनका बलिदान।
आओ प्रण लें हम सब मिलकर आज यही,
वीरों के सपनों का भारत गढ़ेंगे—यही सही।
कौशल
छत्तीसगढ़
वीर बलिदान दिवस
वीर बलिदान दिवस
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