शिर्षक – अंतिम पथ
विधा – कविता
रचनाकार – कौशल
मौलिक रचना
अंतिम पथ पर बढ़ते कदम, मन में जगा उजास,
संघर्षों से सना हुआ, फिर भी अटूट विश्वास।
काँटे बिछे इस राह में, ठहरे नहीं ये पाँव,
हर पीड़ा से सीख लेकर, पाया नया ही चाव।
टूटी–फूटी आशाएँ भी, बनती रहीं पतवार,
दृढ़ निश्चय की धार से, कटा कठिन संसार।
अंधियारी इस डगर में, दीपक बना स्वभाव,
गिरकर उठना सीख लिया, यही जीवन का भाव।
अंतिम पथ यह सिखलाए, अंत नहीं आरंभ,
यहीं से खिलता साहस, यहीं टूटता भ्रम।
जब तक साँसों में दम है, चलता रहूँ अविराम,
अंतिम पथ को जीत लूँ, लिखकर अपना नाम।
कौशल
मुड़पार चु
छत्तीसगढ़
अंतिम पथ
अंतिम पथ
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