शिर्षक – तारा
विधा – कविता
मौलिक रचना
अंधियारी रातों में, तारा मुस्काता है,
सूनी दिशाओं को, आशा दिखाता है।
नन्ही-सी चमक में, अनंत कहानी,
खामोश नभ में, लिखे नई रवानी।
टिमटिम करता तारा, सपनों को जगाए,
थके हुए मन को, आगे बढ़ने सिखाए।
दूर सही आकाश में, पास सा लगता,
हर भटके पथिक को, सही राह बताता।
टूटे हुए ख्वाबों पर, मरहम बन जाता,
अंधेरे के सीने में, उजाला भर जाता।
एक तारा ही काफी, रात सँवारने को,
आस्था की लौ बनकर, जीवन निखारने को।
रचनाकार
कौशल
02.01.2026
तारा
तारा
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