यमुना तट की रजनीगंधा,
मुरली की मधुर पुकार,
वहाँ छुपा है जग का सत्य,
वहाँ बसा है साकार सार।
कभी ग्वालबाल संग खेलता,
कभी गोपियों संग नाचता,
कभी कंस का संहार करता,
धर्म का दीप जलाता।
कृष्णा केवल नाम नहीं है,
जीवन का आधार है,
अनन्त रहस्य समेटे भीतर,
मानवता का उद्धार है।
गीता के प्रत्येक शब्द में,
करुणा और नीति का गान,
कर्तव्य-मार्ग का आलोक है,
अज्ञान हरने का वरदान।
“कर्म करो बस कर्म करो तुम,
फल की चिंता मत कर रे,
यही है जीवन की राह सच्ची,
यही कृष्ण का अमर कहे।”
वृन्दावन की रास-लीला में,
भक्ति का अद्भुत स्वरूप,
जहाँ आत्मा और परमात्मा,
हो जाते हैं एक रूप।
राधा में जो प्रेम छलकता,
वह साधना की ऊँचाई है,
जहाँ वियोग भी माधुर्य बनता,
वहाँ प्रेम दिव्यता पाई है।
महाभारत की रणभूमि में,
अर्जुन के संशय दूर किए,
मोह-माया सब तोड़े उसने,
सत्य के सूत्र भर दिए।
कृष्णा तत्व है जीवन-संघर्ष,
संतुलन का अनुपम ज्ञान,
भक्ति और नीति का संगम,
योग का अद्वितीय वरदान।
कभी बालक, कभी सारथी,
कभी प्रेमी, कभी मित्र,
हर रूप में वह देता है,
जीवन को नूतन चित्र।
हे मुरारी! तेरे चरणों में,
धरती का हर प्राणी झुके,
तेरे तत्व को अपनाकर ही,
मानवता का दीप जले।
कृष्णा तत्व
कृष्णा तत्व
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