शीर्षक – रात में नींद
विधा - कविता
मौलिक रचना
रात उतरती है धीरे, आँखों में सपना बोती,
दिन भर की थकान को चुपचाप पलकों में समोती।
चाँद की चादर ओढ़े, सन्नाटा गीत सुनाए,
नींद की कोमल उँगली, मन के द्वार खटखटाए।
सोचों की परछाइयाँ, अब होने लगती धुंधली,
बीते पल की हलचल, हो जाती है सब शिथिल-सी।
साँसों की लय में घुलकर, समय ठहर सा जाता,
नींद के आगोश में, हर बोझ उतर जाता।
कल की चिंता धीरे-धीरे, मौन में खो जाती,
सपनों की नन्ही कश्ती, दूर क्षितिज तक जाती।
रात की गोद में पाकर, मन विश्राम पाता,
नींद के मीठे स्पर्श से, जीवन फिर मुस्काता।
रचनाकार
कौशल
04.01.2026
रात में नींद
रात में नींद
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