deep analysis"
#10)
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"° जिंदगी के इस सौदा बाजार में,
मैं तमाम तमन्नाएं बेच आया।
कभी घर के लिए, कभी प्यार के लिए,
मैं तमाम तमन्नाओं के लिए, बिकता रहा बाजार में।
हां बिकना तो सही था...! हां जी है बिकना तो सही था!?
पर मोल-भाव इतना हुआ कि,मोल मेरा टूट गया!
जिंदगी के इस सौदे में, मैं खुद से ही रुस गया।।
लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश
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