जब जब बच्चों को डांट लगाती ,
तब तब आप तरह तरह के मुंह बनाते
निस्वार्थ प्रेम लुटाती रहीं अपार,
मिलता रहा आपसे हरदम प्यार और दुलार।
याद जब जब आती आपकी दिल भर आता है,
आपके स्नेह को याद कर आंख भर जाता है।
माता पिता जैसा ही प्रेम दिया
सास ससुर का न एहसाह होने दिया
बच्चों को मेरे दिया आपने स्नेह दुलार
परम धाम से भी देते रहिए आशीष और प्यार।।
अतुलनीय स्नेह
स्वरचित काव्य
श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर
विकासखंड सरायपाली
जिला महासमुंद छत्तीसगढ़
अतुलनीय स्नेह
अतुलनीय स्नेह
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