*हमारा जिस दिन Result आता है उस दिन का सुक्ष्म वर्णन और उस Aspirants कि पीड़ा को जो .... कितने भयानक मानसिक दशा से गुज़रता है.......!!
Result day" उस दिन Aspirants के मन में चलती मचलतीं वो हलचलें मनो उसे शोक दे रही हो,,,पल पल गुजरता समय... परिणाम के और नजदीक ले आती है!...ना खाना ना पानी बस दिमाग में चलती वो..अंनत अनबुझी पहेलियां.. नहीं होगा तो कैसे खुद का सामना करूंगा।....हर पल अपनी नजरें मोबाइल पर इस कदर रखी जा रही है। जैसे...बाज अपने शिकार पर ...... अचानक मोबाइल का नोटिफिकेशन ऑन हुआ... वैसे वैसे उसकी धड़कन अपने चरम पर होती हुई...मन में भगवान को याद करते हुए की बस List में मेरा नाम हो.....(एक गहरी सांस के बाद)
जैसे ही लिस्ट में अपना नाम ना दिखा ...!वो Aspirants जो कुछ देर पहले 1000 विचारों में उलझा था । एकाएक.... शून्य हो जाता है...!😐एक दम शांत स्थिर...!! गुमनाम
अब ..बारी थी अपने मां बाप को बताने की नहीं हुआ मेरा Selection.... यार ..यह सब उनको बताना मानों मां पापा के सपनों को तोड़ने जैसा लगता है... कैसे बोलूं उस मां से जो इस इंतजार में है कि मेरा बच्चा मेरा नाम ऊंचा करेगा... वो परिश्रम जो मेरा बापू coaching की फीस भरने के लिए दिन रात मेहनत करता है..... यहां एकमात्र रिजल्ट नहीं बल्कि आपके परिवार का वो सपना है जो पुरे घर में हर दिन देखा जाता है........
इसके बाद सबसे कठिन मनोदशा...ढलती रात का वो साया जो आपको पूछता है कि क्या हुआ नहीं कर पाया ना ..कर दिया निराश मां पापा परिवार को..देख तेरे friends का हो गया तु.. रह गया तु कुछ नहीं कर सकता... और वो aspirants के समाने मां पापा का चेहरा और उनकी भावनाओं उम्मीदें...का हवा की तरह उससे लिपटकर... आंसुओ 😭 में बिखर जाता है,,उस समय कोई दोस्त साथ नहीं होता कोई प्रेम साथ नहीं होता...सबको success चाहिए। और वो भीगता आपका तकिया...मानो बाढ़ से प्रभावित हो गया हो...
उस एक पल में asprints सब कुछ देख लेता है वो यथार्थ में आ जाता है कौन अपना पराया, ग़लती समय का उपयोग सब कुछ दिमाग में वास्तविक रूप में नजर आ जाता है......!?🥀😊
Solution:- परीक्षा हमें मजबूत बनाती है... हमें वो सहना सिखाती है जिसके लिए हम तैयार नहीं थे... आगे तो बढ़ना होगा अब क्योंकि समय और सफ़र किसी के लिये नहीं रुकता है।... ईश्वर रुपी सत्ता पर यकीन करो उसके हर प्लान हमारे लिए best होगा बस सही समय लाने के लिए.. खुद को इन मुश्किल डगर में सफ़र सा बनकर चलना होगा... क्योंकि यदि कदम आप नहीं बढ़ाओगे तो आपके मां पापा को छोड़कर और किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.. कड़वी है मगर सच्चाई है।
अपनी गलतियों से सीखो और स्वयं को बेहतर करने पर काम करो.. अपने चित्त को एकाग्र करो मन की लहरों को किनारे करते हुए एक कदम और उस मंजिल के लिये।
मैं ठहरा रहा मंजिल के लिये, मैं सीखता रहा ठहरावो से
नियत नीति और वो हिम्मत, मैं सीखता गया ठोकरें से।
Thank you so much "कीमती समय निकालकर अपने अल्फ़ाजो को दिल में जगह दी।
लेख writer ✍️:- नीतू नागर 🔐💯😊
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