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✨ बोलती क़लम
✍️ रचनाकार – कौशल
🌹 श्रृंगार रस / 16 मात्रा छंद
(पद – 1)
तेरी याद सजे हर अक्षर में
मन की कलियों में खुशबू है
क़लम लिखती तेरा नाम सजन
प्रीत धरा पर ज्यों अमृत है
(पद – 2)
तेरी बात रचे हर अर्थ नया
नैन झुके तो पंक्ति बने
तेरा स्पर्श लगे स्याही-सा
हृदय-तरंगों में प्रेम बहे
(पद – 3)
आँचल-सी नरमी छूती मन
होठ खिले तो छंद हँसे
तेरी धड़कन-सी लय लिख दूँ
बोलें भाव महकते श्वास
(पद – 4)
जब चूमे तेरी याद सजन
स्याही दीपक-सी जलते
काग़ज़ बने प्रेम का मंदिर
दूरी पिघले मिलते-मिलते
(पद – 5)
पलकों पर सपनों की बारात
हाथों में तेरी उँगली-सी
क़लम थामे तेरा अनुराग
हर पंक्ति तेरा संगीत
(पद – 6)
मन के रेशम धागे जागें
लिख दूँ सूरज चंदा भी
प्राण-प्रकाश तुझसे पाता
छू ले नभ की ऊँचाई
(पद – 7)
रूठा शब्द मनाता तुझसे
सरगम बने तेरी बोली
तेरी बाहों-सी नर्म क़लम
दिल की पीर निकाले वोही
(पद – 8)
जीवन-स्याही तुझसे जगती
श्वासों में बस तू प्रियतम
अमर रहे यह प्रेम कहानी
क़लम कहे बस – तुम ही तुम
कौशल...
बोलती क़लम
बोलती क़लम
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