' सुई की नोक "
सुई की नोक पर लटकी है मेरी रूह,
एक झोंका हवा, और बिखर जाएँ आँसुओं के मोती।
धागे-से बंधे हैं टूटते सपने,
काँपती उँगलियाँ, खून से सने रिश्ते।
पैरों तले खाई, ऊपर आसमाँ रोता है,
साँसें अटकीं गले में, नाम तेरा पुकारतीं।
दर्द की सुई चुभती है सीने के पार,
फिर भी तेरी यादों में मुस्कुराहट छिपाए बैठा हूँ।
समय की नोक पर कटती हैं रातें,
बीते पल लौट आओ, ये दिल चीखता है।
अकेला खड़ा हूँ इस बारीक़ धार पर,
टूटने से पहले, बस एक बार तू थाम ले।
उड़ना चाहता हूँ, गिरने से डरता हूँ,
सुई की नोक पर नाचती है मेरी तन्हाई।
विषाद की लहरों में डूबा हुआ,
तेरे बिना अधूरी, फिर भी जीने की जिद्द लिए रोता हूँ।
रचनाकार -कौशल, मुड़पार चु,पोस्ट रसौटा, तहसील पामगढ़, जिला जांजगीर चांपा, छत्तीसगढ़
सुई की नोक
सुई की नोक
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