कलम संगिनी

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दिल की राख

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 93 Posts Oct 2025

दिल की राख

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--- शिर्षक: “दिल की राख” शायरी रात ने चाँद को भी छुपा लिया किसी बात पर, हमने भी दिल को सुला लिया हर आघात पर। अब ना तेरा नाम, ना कोई इलज़ाम बाकी, बस राख रह गई है उस जज़्बात पर। वो हँसी, वो बातें, सब धुँधली सी हो गईं, आँखों में परछाइयाँ, यादें बोझिल हो गईं। कभी जो धड़कन में थी, अब खामोशी में है, मोहब्बत भी अब अपनी मंज़िल खो गई। रचनाकार -कौशल, मुड़पार चु, पोस्ट रसौटा, तहसील पामगढ़, जिला जांजगीर चांपा, छत्तीसगढ़

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