कलम संगिनी

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सत्यमेव जयते दशहरा अधर्म का नाश

सत्यमेव जयते दशहरा अधर्म का नाश

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सत्यमेव जयते दशहरा अधर्म का नाश
विषय - सत्यमेव जयते दशहरा अधर्म का नाश नवदिन ,नवरात्रि के पश्चात, आता शुभ दशहरा। जग का कोना कोना है ,खुशियों से भरा।। सभी क्षेत्रों में होते अलग अलग रीति रिवाजों से रथ की चोरी ।(बस्तर) तो कही रावण के पुतले को देते अग्नि की ढेरी।।(C G) हाहाकार के पश्चात आता पावन पर्व। हर सनातनी को होता जिस पर गर्व । मां दुर्गा का आशीष लेकर धर्म गया जीत। असुरों का नाश कर ,मिला श्री राम को मनमीत ।। यश कीर्ति जग में फैले बनाओ उच्च विचार। हर घर में गर रावण ही मिले तो कैसा होगा संसार । रावण सा मन लेकर जीवन दुर्लभ बन जायेगा । राम सा अब न कोई इस जीवन में आएगा मन के अंदर बहुरूपिए रावण को जो बैठाया है अधर्म पाप कर जीवन में अंधकार फैलाया है । अहंकार का करो नाश जग में फैलाओ प्रकाश। राम सा हृदय रख जीवन में लाओ विश्वास।। श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर विकासखंड सरायपाली जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

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