आत्म निर्भर भारत
स्वतंत्रता मिली स्वदेशी मंत्रों से ,
देश की समृद्धि भी स्वदेशी से ।
विदेशी वस्तुओं को दूर भगाओ ,
स्वदेशी का डंका बजाओ ।
आओ सजाएं घर का कोना-कोना ,
हर गली ,हर घर में स्वदेशी ही होना ।
लोकमान्य तिलक का भी था यही नारा ,
स्वदेशी अपनाओ जग सारा ।
आजादी है अगर बचानी ,
पड़ेगी स्वदेशी सबको अपनानी।
जब होता स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग ,
देश की अर्थव्यवस्था का सुदृण होता योग।
किसान कारीगर को मिटा रोजगार,
अर्थव्यवस्था की सुधार में हम भी बने भागीदार ।
स्वदेशी वस्तुओं से संस्कृति जीवित होती है ,
देश की समृद्धि और भी फलित होती है।
महात्मा गांधी ने भी दिया संदेश आंदोलन में चरखा चलाकर ,
यह आंदोलन नहीं है अंग्रेज़ी भगाओ स्वदेशी अपनाकर।
स्वरचित काव्य रचना
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखंड सरायपाली
जिला महासमुंद छत्तीसगढ़
स्वदेशी अपनाओ आत्म निर्भर भारत
स्वदेशी अपनाओ आत्म निर्भर भारत
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