कलम संगिनी

कलम संगिनी

हमर पहुना

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 93 Posts Oct 2025

हमर पहुना

12 Views
0 Likes 0 Comments
1 Saves
0 Shares
हमर पहुना
शिर्षक – "हमर पहुना" मौलिक रचना हमर पहुना आथे त घर झनका जाथे, सूना आँगन म खुशी झन-झन छा जाथे। माटी महक उठे, चूल्हा मुस्काथे, पहुना संग संग सुख-दुख बतिया जाथे। पानी-पखरा ले स्वागत हो जाथे, मीठ बोली म अपनापन झर जाथे। चउर-भाजी के खुशबू फइल जाथे, मन के कोठा म उजास भर जाथे। पहुना खातिर दिल झन थकथे, सेवा म हाथ झन कभू रुकथे। लाज-सरम सब दूर हो जाथे, मया-प्रीत म नाता गुँथ जाथे। हँसी-ठिठोली संग रात कट जाथे, कहानी म बचपन लौट आथे। पहुना जाए त आंखी भर आथे, मन पूछे – काबर जल्दी जाथे। हमर संस्कृति के पहचान ये नाथे, पहुना म भगवान बस जाथे। रचनाकार –" कौशल" 17.01.2026

Comments (0)

Click to view
Footer