काव्य
अशांत हृदय 😒
अंतर्मन के व्यथा से बीती रैन न गुजरी ,
ह्रदयस्थल पीड़ा से न उभरी।।।😭
जब जब हृदय पर अंधकार छाया,
न दिन,न रैन हृदय पर सुकून आया।
जब होता अंतर्मन में पीड़ा के बादल ,
हृदय घबराता मन होता घायल ।
जब जब हृदय दर्द से कराहता ,
न दुआ ,न दवा काम आता ,
एक सुकून अपनो के संग आता ।
लेकर मन में अटूट निश्चय,
ठान लिया हृदय में न आने दूंगी भय ।
भय को जीवन से दूर भगाउँगी ,
एक दिन जरूर भय से जीत जाऊंगी ।
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
जिला महासमुंद छत्तीसगढ़
अशांत हृदय
अशांत हृदय
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