शिर्षक -जुगनू
विधा -कविता
श्रेणी - प्रेरणादायक
मौलिक रचना
रचनाकार -कौशल
रात के अंधेरे में चमकता,
छोटा सा जुगनू उड़ता फिरता।
कोई बड़ा सितारा नहीं वो,
फिर भी रोशनी बांटता हर जगह।
हम भी ऐसे ही बन जाएं,
छोटे प्रयास से बड़ा काम करें।
डर न लगे काले बादलों से,
अपनी चमक से रास्ता बनाएं।
हर बच्चा, हर इंसान में है,
जुगनू जैसी ताकत छिपी हुई।
उठो, जगमगाओ, न हार मानो,
जीत तुम्हारी होगी निश्चित। ।
अंधकार के वक्ष में जन्मा दीपक,
स्वयं नष्ट होकर जग को ज्योति देता।
अनंत रात्रि में क्षणिक संदेश उसका,
आत्मबल की अमर गाथा गाता।
हमारी आत्मा में वह जुगनू सुलगता,
वासना के तम से लड़ता अनवरत।
सपनों के पथ पर चिंगारी बनकर,
भवसागर पार करा ले जाता।
विफलता के घने जंगल में भी,
उसकी एकलक झलक मार्ग दिखाए।
जुगनू बनो, नश्वर शरीर में अमर हो जाओ,
प्रकृति का रहस्य समझ लो सब।
ग्रief के साये में भी प्रेरणा जागे,
जुगनू सी चमक से जीवन रंगीन करो।
हर पल संघर्ष, हर क्षण विजय की ओर,
आत्मज्योति से संसार जीतो।
कौशल
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