स्वरचित पंक्तियों को गीत का रूप,,,
माथे पर चंद्र शीश पर शोभाए हैं ,
मां का रूप मनोहर मन को भाए है
आई सिंह पर सवार ,लेकर हाथ में कटार ,
शेरावाली मैया ,आई सबके द्वार ।।
तृतीय दिवस माता चंद्रघंटा करें सिंह सवारी ।
जो सुमिरन करे माता का संकट कटे सारी ।।
जय माता दी 🙏🏻
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
जिला महासमुंद छत्तीसगढ़
मां चंद्रघंटा
मां चंद्रघंटा
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