कलम संगिनी

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मां चंद्रघंटा

मां चंद्रघंटा

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मां चंद्रघंटा
स्वरचित पंक्तियों को गीत का रूप,,, माथे पर चंद्र शीश पर शोभाए हैं , मां का रूप मनोहर मन को भाए है आई सिंह पर सवार ,लेकर हाथ में कटार , शेरावाली मैया ,आई सबके द्वार ।। तृतीय दिवस माता चंद्रघंटा करें सिंह सवारी । जो सुमिरन करे माता का संकट कटे सारी ।। जय माता दी 🙏🏻 प्रतिभा दिनेश कर विकासखण्ड सरायपाली जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

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