ओस के बूंद
कविता
स्वरचित
रात की चुप्पी में जन्मी,
भोर की गोद में हँसी ओस।
पत्तों पर मोती-सी चमकी,
सूरज छूते ही पिघली ओस।
क्षणिक जीवन का सच कह गई,
मौन में अमर कथा लिख गई ओस।
रचनाकार
कौशल
05.01.2026
ओस के बूंद
ओस के बूंद
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