कलम संगिनी

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कविताएं (12)

फूल और भंवरा

कहानी फूल और भंवरा स्वरचित एक चांदनी रात से सजे उस जादुई बाग में, जहां हर पत्ता प्रेम की सांस लेता था और हवाएं दिलों की धड़कनों को गुनगुनाती थ...
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हमर पहुना

शिर्षक – "हमर पहुना" मौलिक रचना हमर पहुना आथे त घर झनका जाथे, सूना आँगन म खुशी झन-झन छा जाथे। माटी महक उठे, चूल्हा मुस्काथे, पहुना स...
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मकर संक्रांति

शिर्षक - मकर संक्रांति आज मकर संक्रांति के पावन दिन ला, सूरुज देवता Capricorn मा आथे, दिल ला छूथे। खेत-खार मा फसल लहराथे, आँखी मा आँसू खुशी...
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छेरछेरा

छेरछेरा (छत्तीसगढ़ी कविता | मौलिक रचना) छेरछेरा छेरछेरा, दान धरम के बेरा, घर-घर गूंजे सुर मं, खुशी के हे फेरा। नवा धान के खुशबू, अँगना ल महकाए, ...
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तिरंगा हमारी पहचान

काव्य : तिरंगा देश की आन ,बान, शान तिरंगा है हमारी पहचान। इसकी शान में है हिंदुस्तान। लहराता है आसमान में तीन रंग। दिल में भर देता है देशभक्ति...
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श्री सिया राम जी का पाणिग्रहण संस्कार

*श्री सीताराम जी का विवाह दिवस* मंगल मूल लगन दिन आवा, हिम ऋतु अगहन मास सुहावा, ग्रह तिथि नखत जोग बर बारू, लगन शोधि विधि कियो विचारू। सिया र...
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मन के बोझा

शिर्षक - मन के बोझा विधा - छत्तीसगढ़ी कविता श्रेणी- प्रेरणादायक रचनाकार -कौशल मन के बोझा दिन-ब-दिन बढ़थे, सोच के जंजीर, नींद के घड़ी घटथे...
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डॉ रंजना द्विवेदी, 51 वीं साल गिरह

*आज 51वीं सालगिरह पर – ज़िन्दगी से सीखी 51 बातें* 1. जीवन बहुमूल्य है। 2. मुस्कान अनमोल है। 3. आत्मसंतुष्टि ही असली उपलब्धि है। 4. खुद से प्रेम कर...
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गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा (स्वरचित कहानी) उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से गाँव में महेश अपनी माता जी, जीवनसंगिनी और पाँच वर्षीय पुत्र गोपाल के साथ रहते थे। गाँव में...
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शबरी की राहों में राम आये

शिर्षक -शबरी की राहों में राम आये विधा - कविता श्रेणी - अध्यात्मिक शिवरीनारायण के घाट पे, तीन नदियाँ मिल गइ रे, राम नाम गाती लहरें —कब राम म...
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जादू का नगरी

=======.================ जादू का नगरी नीले अम्बर के नीचे चलता है सपनों का कारवाँ, फूलों की खुशबू में छुपा है ज्ञान का प्रकाश, पंछियों की चहचहा...
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सावन भादों की झड़ी

सावन भादों की झड़ी गाँव में सावन का महीना शुरू होते ही जैसे धरती पर खुशियों की बरसात हो गई थी। पेड़–पौधे हरे–भरे हो गए, खेतों में नन्हें–नन्हें अंक...
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