कलम संगिनी

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कविताएं (12)

नारीत्व

नारी जीवन संघर्ष है, उसका ऊँचा मान। उससे ही उजियारा है, घर परिवार जहान।। जब-जब उस पर वार हो, अन्यायों की मार। तब-तब न्यायालय करे, न्यायपूर्ण विचार।...
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मां को श्रद्धांजलि अर्पित 🌸

मां को श्रद्धांजलि ✍️ प्रतिभा दिनेश कर | 📅 17/3/2026 🙏🏻🌸अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित मां 🌸🙏🏻 स्वर्ग की सीढ़ी पर आत्मा आपकी चढ़ती जाए, जन्म मरण...
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शहद की मिठास

विर्षक- शहद की मिठास विधा -कविता मौलिक रचना पीली किरणों में छुपी वो मिठास, फूलों की आत्मा से बनी अमृत की धारा, मधुमक्खियों की मेहनत में ब...
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*मेरी माँ एक विलक्षण कुशल गृहिणी*

*मेरी माँ श्रीमती पद्मा मिश्रा एक विलक्षण कुशल गृहिणी* अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष तुम्हारे हाथ में वो जादू है जो कुछ बिगड़ने नही...
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*भारत की नारी*

भारत की नारी भारत की नारी शक्ति का अवतार होती है, गंगा की निर्मल धार होती है, सद्गुणों की खान होती है। कभी फूल कभी चट्टान होती है। परिवार ...
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शांति की तलाश में युद्ध के विकल्प में अशांत होता विश्व समुदाय

*शांति की खोज में अशांत होता विश्व* आज विश्व शांति की खोज में लगातार अशांत होता जा रहा है, क्योंकि विश्व में राजनीतिक संघर्ष, आर्थिक प्रतिस्पर्धा औ...
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हे रहमान, हे रहीम, हे करीम, हे मौला

Here's the translation: *Hindi Translation:* हे रहमान, हे रहीम, हे करीम, हे मालिक ए मौला, आपने हमें जीवन बख्शा और अपनी इबादत का सुनहरा मौका ...
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बसंत पंचमी

--- बसंत पंचमी पीली चादर ओढ़ धरा मुस्काई, फूलों ने खुशबू आज लुटाई। कोयल ने छेड़ी मधुर तान, मन में जागा नया अरमान। सरसों के खेतों में छाया ...
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जांगर

शिर्षक जांगर छत्तीसगढ़ी कविता स्वरचित जांगर मोर छत्तीसगढ़ के, दिल के गहराई ले भरा। खेत खार मा पसीना बहत, आंसू जइसे गिरा। सूरज निकलत बि...
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पुराना घर

"पुराना घर" मौलिक रचना पुराना घर आज भी मुझसे बातें करता है, दीवारों में कैद हर लम्हा साँसें भरता है। आँगन की मिट्टी में बचपन सोया मिल...
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यादों के झरोखे से: वर्षों बाद घर जाना

*बरसों बाद घर जाना ...* माना बरसों हो गए तुमसे मिले हुए, पर यादो में हमेशा संग थे हम। बरसो बाद तुम से मिलकर यूँ लगा, मानो बस इसी मुलाकात के इंत...
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बरसों बाद घर जाना….

*बरसों बाद घर जाना ...* माना बरसों हो गए तुमसे मिले हुए, पर यादो में हमेशा संग थे हम। बरसो बाद तुम से मिलकर यूँ लगा, मानो बस इसी मुलाकात के इंत...
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